CBSE Exam Pattern: 9वीं-10वीं के छात्रों को   समझकर देने होंगे उत्तर, योग्यता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ी

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CBSE Board : सीबीएसई ने कक्षा 9वीं और 10वीं और 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया है। पहले जिस तरह से स्कूलों में आंतरिक परीक्षा होती थी, वह भी उसी तरह होगी। बोर्ड के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति योग्यता आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देती है। योग्यता आधारित शिक्षा छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों का सक्रिय रूप से सामना करने के लिए तैयार करेगी।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से मान्यता प्राप्त स्कूलों के नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्रों को अब रटने की जगह कॉम्प्रिहेंशन का जवाब देना होगा। इन कक्षाओं के लिए बोर्ड ने एप्टीट्यूड आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी है। अब 40 प्रतिशत ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें घटना आधारित प्रश्न भी होंगे। जबकि ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा में योग्यता आधारित प्रश्नों की संख्या 30 प्रतिशत होगी। सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए परीक्षा का पैटर्न जारी कर दिया है।

सीबीएसई ने कक्षा 9वीं और 10वीं और 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया है। पहले जिस तरह से स्कूलों में आंतरिक परीक्षा होती थी, वह भी उसी तरह होगी। बोर्ड के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति योग्यता आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देती है। योग्यता आधारित शिक्षा छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियों का सक्रिय रूप से सामना करने के लिए तैयार करेगी। ऐसे में बोर्ड ने मेरिट आधारित प्रश्नों को परीक्षा प्रणाली में शामिल किया है। इससे छात्रों को याद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि उन्हें अपनी समझ से जवाब देना होगा।

40 फीसदी प्रश्नों के जवाब अपनी समझ से देने होंगे 

9वीं-10वीं में स्टूडेंट्स को 40 फीसदी सवालों का जवाब अपनी समझ से देना होगा। इसमें इवेंट आधारित प्रश्न, एमसीक्यू प्रश्न भी शामिल होंगे। जबकि 20 प्रतिशत प्रश्न बहुविकल्पीय और 40 प्रतिशत लघु उत्तरीय प्रश्न होंगे। जबकि पिछले सत्र में टर्म-1 में 30 प्रतिशत योग्यता आधारित प्रश्न पूछे गए थे।

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50 फीसदी प्रश्न लघु व दीर्घ प्रश्न वाले होंगे

बारहवीं कक्षा में 50 प्रतिशत प्रश्न छोटे और लंबे प्रश्नों के होंगे। वहीं मेरिट आधारित प्रश्नों की संख्या 30 प्रतिशत होगी। और 20% प्रश्न बहुविकल्पीय प्रकार के होंगे। जबकि दो सत्र टर्म-1 और टर्म-2 की परीक्षा प्रणाली के तहत पहले टर्म में 20% एप्टीट्यूड आधारित प्रश्न पूछे गए थे. जबकि टर्म-2 की परीक्षा चल रही है जिसमें 20 प्रतिशत एप्टीट्यूड आधारित प्रश्न पूछे जा रहे हैं.

ज्ञात हो कि पिछले महीने ही बोर्ड ने घोषणा की थी कि शैक्षणिक सत्र 2022-23 से पुरानी व्यवस्था के तहत बोर्ड की परीक्षा सिर्फ एक बार होगी. कोरोना महामारी के चलते बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 की व्यवस्था को दो सत्रों (टर्म-1 और टर्म-2) में बांटा था। जिसमें पचास प्रतिशत पाठ्यक्रम के अनुसार परीक्षाएं कराई गईं।

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